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सांस्कृतिक गतिविधियाँ

नवोन्मेष :

सत्रारम्भ में नए विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के समक्ष प्रतिवर्ष किया जानेवाला यह प्रथम कार्यक्रम होता है। इस दिन कॉलेज के नए सत्र की शुरूआत होती है। इस कार्यक्रम में नए विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक अपने सपने और लक्ष्य साझा करते हैं और यह भी बताते हैं कि उन्होंने PCGE ही क्यों चुना? यह शेयरिंग हमें अपने सत्र को और बेहतर बनाने के लिए मार्गदर्शक का कार्य करती है। प्राय: इस कार्यक्रम में कोई-न-कोई शिक्षाविद् एवं विशिष्ट पदों पर कार्यरत PCGE के एल्यूमनी (पूर्व छात्र) मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होते हैं।

गुरूत्सव :

यानी सभी जगह ‘शिक्षक दिवस’ पर केवल शिक्षकों का सम्मान होता है किंतु यह PCGE की एक अनूठी सांस्कृतिक गतिविधि है जहाँ गुरूत्सव में PCGE के सभी कर्मचारियों-सफाईकर्मी, गाडर््स, ड्राईवर्स, सहायक कर्मचारी, कम्प्यूटरकर्मी, लेखा विभाग के कार्मिक, पुस्तकालय के सहकर्मी से लेकर शिक्षकों तक सभी का सम्मान होता है। गुरूत्सव विद्यार्थियों के लिए अद्भुत कार्यक्रम है क्योंकि वे इसके द्वारा एक ओर वे सबके बीच सामाजिक समता-समानता का पाठ सीखते हैं वहीं दूसरी ओर शिक्षकों, कर्मचारियों की सर्जनात्मक प्रस्तुतियों से वे स्वयं भी अपनी छुपी हुई प्रतिभा, रचनात्मकता को बाहर लाने के लिए प्रेरित होते हैं।

सभी शिक्षक एवं कर्मचारी छात्रों को प्रेरित करने के लिए उनके सामने नृत्य, डांडिया, नाटक, गीत आदि प्रस्तुत करते हैं। लगभग 100 शिक्षकों का संयुक्त डांस व रेम्प शो आदि प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक शिक्षक को मजबूत व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। अगले दिन विद्यार्थियों द्वारा कक्षा में शिक्षकों का अधिक उत्साह के साथ, अधिक निकटता के साथ अभिवादन किया जाता है। विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों के मेहमानों पर भी शिक्षकों की इस प्रस्तुति का शानदार प्रभाव रहा है। वे इस गतिविधि और इस प्रस्तुति के पीछे की धारणा से अभिभूत रहे हैं।

मुकुन्दोत्सव :

मुकुंदोत्सव PCGE के नवागंतुक छात्र-छात्राओं की फ्रेशर पार्टी होती है। मुकुंद का मतलब है ‘कली’ जो पुष्प बनने को तैयार है।

   नए आए हुए छात्र-छात्राओं का सीनियर विद्यार्थी एवं शिक्षक मिलकर स्वागत करते हैं। इस दिन होनेवाले सांस्कृतिक कार्यक्रम की सभी प्रस्तुतियाँ नवागंतुक विद्यार्थियों के द्वारा दी जाती हैं ताकि वे झिझक से स्वतंत्र होकर आत्मविश्वास में भर अपनी रचनात्मकता, सर्जनात्मकता को खुलकर प्रस्तुत कर सकें। मुकुंदोत्सव जहाँ नए विद्यार्थियों को कॉलेज की संस्कृति एवं परम्परा से परिचित करवाता है वहीं विद्यार्थियों को आनेवाले वर्षों में आयोजित होनेवाली विभिन्न गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित करता है।

विज्ञानोत्सव

   PCGE में BSc के विद्यार्थियों का प्रायोगिक कार्य केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है वरन् विगत दो वर्षों से ”विज्ञानोत्सव“ का आयोजन कर विद्यार्थियों द्वारा निर्मित मॉडल्स की प्रदर्शनी लगाई जाती है।

  • इस विज्ञानोत्सव में विज्ञान वर्ग के सभी विद्यार्थी भाग लेते हैं। इस विज्ञानोत्सव में विद्यार्थी विभिन्न प्रकार के working, non-working, model, chart or Poster बनाते हैं तथा इन सबको विज्ञान मेले में प्रदर्शित करते हैं। यह सभी model विद्यार्थी कॉलेज में नियमित कक्षाओं के बाद अतिरिक्त समय में परिसर में ही बनाते हैं। इसमें सभी शिक्षक भी विद्यार्थियों की मदद करते हैं। श्रेष्ठ मॉडल select किये जाते हैं तथा उन्हें प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कार भी दिये जाते हैं तथा जितने भी विद्यार्थियों ने भाग लिया उन सबको ‘प्रमाण-पत्र’ दिए जाते हैं।
  • इस विज्ञान मेले का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ाना है, ताकि विद्यार्थी किताबों से थोड़ा हटकर अपने दिमाग का विकास कर सके, कुछ नया सोच सके नया रच सके, नया बना सके और अपने आत्म विश्वास को बढ़ा सके।

नाट्यरंग

   PCGE का उद्देश्य प्रत्येक विद्यार्थियों का चहुँमुखी विकास कर उसके व्यक्तित्व का उéयन करना रहा है और यह एक निरन्तर चलनेवाली प्रक्रिया है। प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए आज़ादी नाटक है तो BSc, BA, BCom, BCA द्वितीय, तृतीय वर्ष व MA, MCom के छात्रों के लिए ”नाट्य रंग“ नामक नाट्य समारोह का आयोजन प्रतिवर्ष की परम्परा रही है। इस प्रकार ‘नाट्य रंग’ में प्रथम वर्ष को छोड़कर शेष सभी छात्रों की नाटक में भागीदारी करवाकर उनके व्यक्तित्व में निखार का प्रयास किया जाता है।

   नाट्य रंग में ‘नयन जोड़ के बाबू’, ‘उजाले के मुसाहिब’, ‘तिरिछ’, ‘नीम का पेड़’, ‘अंधेरी नगरी’, ‘सारे जमीं पर’, ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’, ‘रामसिंह की ट्रेनिंग’, ‘चुल्लूभर पानी’, ‘पिंटी का साबुन’, ‘पचास लाख का कर्ज’ आदि लगभग पच्चीस से अधिक नाटकों का मंचन किया जा चुका है। इन नाटकों का निर्देशन भी राजस्थान रंगमंच के जाने-माने निर्देशकों के निर्देशन में, जयपुर ही नहीं वरन् भारत के प्रसिद्ध रंगमंच, रवीन्द्र मंच पर किया जाता है, ताकि हमारे विद्यार्थियों को न केवल स्थापित निर्देशकों के साथ कार्य करने का अवसर मिले, अपितु रंगमंच पर अपनी प्रतिभा की आभा बिखेरने का सुअवसर भी प्राप्त हो सके।

रसरंग – वार्षिक खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम

   यह वार्षिक खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत विभिन्न गतिविधियाँ की जाती हैं। हम संकल्पित हैं कि छात्र-छात्राएँ विभिन्न गतिविधियों में ज्यादा-से-ज्यादा भाग लें। ये सब गतिविधियाँ छात्रों द्वारा शिक्षकों के निर्देश में की जाती हैं।

   रसरंग के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जैसेकि – नृत्य, नाटक, वाद-विवाद, आशुभाषण, गीत, विभिन्न वेशभूषा, रेम्प वॉक, कविता, कहानी, निबंध, मेहंदी, रंगोली, पेंटिंग्स, बिना आग के व्यंजन, सलाद डेकोरेशन व खेलकूद की विभिन्न प्रतियोगिताएँ। इस दौरान कॉलेज में उत्साह एवं मौज-मस्ती का माहौल रहता है।

बुलन्दियाँ

PCGE की समस्त प्रतिभाओं और उन्नतियों को सम्मानित करने का स्वर्णिम कार्यक्रम है – बुलंदियाँ। PCGE इस कार्यक्रम को महोत्सव के रूप में मनाता है।

बुलंदियों में PCGE के होनहारों को पुरस्कार से सम्मानित कर उनका मनोबल बढ़ाया जाता है। यह सत्र के अंत में आनेवाला कार्यक्रम है जिसकी प्रतीक्षा परिष्कार के सभी विद्यार्थी बेसब्री से करते हैं। परिष्कार में सत्रपर्यंत की गई प्रत्येक प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियाँ जिसमें प्रत्येक विद्यार्थी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं उनमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करते हैं। उन पुरस्कारों को प्राप्त करने का यह उनका अपना कार्यक्रम है जो नए विद्यार्थियों में भी जोश-उमंग भरता है। PCGE विद्यार्थी की उपलब्धियों पर उन्हें पुरस्कृत करता है जिससे विद्यार्थी बढ़ चढ़कर अपनी प्रतिभा को पूर्ण निखार सकें। PCGE के सभी First Divisioners, OMR, Mid-Term, Pre-University परीक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले, कॉलेज टॉप करने वाले, Risers & G.K. की परीक्षा में अधिकतम अंक लाने वाले साथ ही सह-शैक्षणिक गतविधियों में भाग लेकर स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाता है।

PCGE प्रत्येक वर्ष बुलंदियों में ‘परिष्कार रत्न’ पुरस्कार भी देता है। यह पुरस्कार महाविद्यालय के उन प्रतिभाशाली, सक्रिय विद्यार्थियों को दिया जाता है जो नियमित रूप से महाविद्यालय की परम्पराओं, संस्कृति को पूर्णत: अपनाता है तथा जो नियमित रूप से शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। ‘परिष्कार रत्न’ के लिए विद्यार्थी को PCGE के कुछ मानदण्ड़ों को पूरा करना पड़ता है जैसे कि नियमित उपस्थिति, सभी प्रकार की मूल्यांकन प्रणाली में विद्यार्थी की सहभागिता जैसे कि OMR टैस्ट, मिड टर्म टैस्ट, प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा इत्यादि सह-शैक्षणिक गतिविधियों में अपनी पूर्ण सहभागिता निभायी हो। वही विद्यार्थी परिष्कार रत्न का वास्तविक हकदार होता है।

नवप्रयाण (नए लक्ष्यों की ओर प्रयाण करने हेतु अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों का विदाई कार्यक्रम)

   PCGE में ‘नवप्रयाण’ एक सामूहिक उत्सव है यह खुशी व ग़म का दिन होता है- खुशी नए भविष्य की ओर अग्रसर होने की होती है तो ग़म कॉलेज व शिक्षकों से बिछुड़ने का होता है।

   विदाई के गीत, सभी का साथ, हाथों में हाथ और कंधे से कंधा जुड़ा हुआ – इस आत्मीय और भावनात्मक सौहार्द के साथ छात्रों को विदाई दी जाती है। यह नवप्रयाण सिर्फ कुछ घंटों का नहीं है। बल्कि परिणाम है दो से तीन वर्षों के जुड़ाव के विकास का जोकि शिक्षक व छात्रों ने कॉलेज में साझा किया है। नवप्रयाण वह जुड़ाव है जो भविष्य में भी छात्रों और शिक्षकों को जोड़े रखता है, वे आगे भी PCGE से जुड़े रहते हैं।