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स्व-निर्देशित प्रशिक्षण प्रणाली

  • गुणवत्तावाले सभी जागरूक संस्थानों में शिक्षक-प्रशिक्षण की अनिवार्यता और कार्यक्रमों के आयोजन होते रहने के बावजूद, शिक्षण-प्रशिक्षण शिक्षा का सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है।
  • शिक्षकों के प्रशिक्षण के लंबे अनुभव के बाद, PCGE के प्रबंधन ने एक ‘स्व-निर्देशित प्रशिक्षण कार्यक्रम’ विकसित किया है जहाँ हर शिक्षक अपनी अंतरदृष्टि और सर्जनात्मक प्रयासों से स्वयं ही सीखता है।
  • सीखने के लिए आवश्यक बात है कि सीखने का मजबूत इरादा होना, अन्य शिक्षकों के साथ अपने अनुभवों (Directed Training Program) को साझा करना तथा हर अनुभवों का विश्लेषण करते हुए बेहतर निर्णय लेना और इस तरह अपने कार्य को बराबर सुधारते जाना।
  • हम न केवल जानकार और कुशल शिक्षकों को चुनते हैं, बल्कि हम उन शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर नियुक्त भी करते हैं जो स्वयं क्रियेटिव हैं और छात्रों के रचनात्मक पहलू को भी प्रेरित करने की क्षमता रखते हों।
  • ज्ञान और कौशल का प्रसारण तब होता है जब एक शिक्षार्थी अपनी शिक्षा में सकारात्मकता और रचनात्मकता सोच के साथ सक्रिय होता है। इसके लिए शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए ज्ञान या कौशल का अच्छी तरह से विकास करने के लिए सर्वप्रथम उनके दृष्टिकोण को सकारात्मक और सर्जनात्मक बनाना आवश्यक है। यह अनुभव PCGE में अब एक सीख (Learaning) के रूप में बदल गया है। इसके लिए शिक्षकों के लिए ‘उपनिषद’ कार्यक्रम है जो प्रत्येक माह के पहले/आखिरी शनिवार को आयोजित होता है जिसमें शिक्षक ही अपने शिक्षक साथियों को अपने अनुभवों को शेयर करते है यही प्रक्रिया स्व-निर्देशित प्रशिक्षण प्रणाली का पहला चरण है।
  • PCGE में अन्य शिक्षकों की कक्षाओं में बैठकर सीखना और उन्हें सिखाना, इस प्रकार एक शोधकर्ता के दृष्टिकोण के साथ सभी शैक्षिक गतिविधियों को अंजाम देना होता है। यह हर शिक्षक की अंतरदृष्टि, ज्ञान और कौशल को काफी हद तक विकसित करता है। PCGE के शिक्षक आमतौर पर स्व-प्रेरणा से काम करते हैं।

इस प्रकार PCGE का मजबूत एवं महत्वपूर्ण पक्ष यही स्वनिर्देशित प्रशिक्षण प्रणाली है।